27 November 2019

ELLÄCHI KUMÄR | इलायची कुमार | Jain Stuti Stavan

ELLÄCHI KUMÄR  
इलायची कुमार


बहुत समय पहेले की बात है इलावर्धन नगर मे प्रतिष्ठत धनदत्त व धारिणी देवी का परीवार रहता था । 
बहुत ही परमात्मा भक्ति से बालक का जन्म होता है । 
बहुत ही लाड़ प्यार मे बालक का लालन पालन होता है । 
परीवार के इकलौता लड़के का नाम इलायची कुमार रखा जाता है समय के साथ सभी प्रकार की विंध्यायो को सिखते हुए युवान वय को प्राप्त होता है । 
माता पिता पुत्र के लिए योग्य कन्या की खोज मे लग जाते है जिससे समय पर विवाह हो सके । 
बहुत ही ख़ानदानी व संस्कारी परिवारों की बेटियों के रिश्ते आने शुरू हो जाते है । 
इलायची कुमार को अभी तक कोई भी कन्या जीवन संगिनी के लिए पंसद नही कर पाता है । 
उसी समय के दरम्यान नगर मे नटों के कबिले का आगमन इलावर्धन नगर मे होता है । 
कबिले के कलाकार ऊँचे ऊँचे रस्सीयो पर चढ़कर विभिन्न प्रकार के करतबों से नगर जनों को आकर्षित करते है । 
एक बार इलायची कुमार भी करतब देखने जाता है और कलाकारों के करतब से आकर्षित होता है विशेष नट परिवार की लड़की लीलावती से जो बहुत ही रूपवान व नृत्य मे माहिर । 
इलायची कुमार मनो मन उसे अपनी धर्मपत्नी बनाने की सोच लेता है । 
विवाह करूँगा तो इसी से नही तो उम्र भर कुवांरा ही रहुंगा ।
पिता ने पुत्र को बहुत समझाया लेकिन पुत्र नहींA माना था । 
पिता पुत्र के आगे हार कर नट कन्या के पिता से अपने पुत्र के लिए याचना करता है ।
नट कन्या के पिता ने कन्या देने के लिए हाँ भर ली परंतु एक शर्त रख दी | 
जब तक आपका पुत्र नट विद्या नहीं सीख लेता है मेरी पुत्री नहीं दूंगा| पिता हार गया इलायची कुमार को फिर से समझाया बेटा नही माना |
इलायची कुमार नट परीवार में शामिल हो जाता है और नगर नगर भ्रमण कर रहा है |
नट विद्या सीखते सीखते वर्ष भी बीत जाता है इलायची कुमार नट विद्या में पारगंत हो जाता है। 
कुछ दिनों पश्चात वेन्नातट नगरी मे आते है ।
इलायची कुमार बोलता है अब हमारी शादीकरा दो । 
नट कन्या का पिता बोलता है आज तुम्हारी अंतिम परीक्षा है यहां के राजा को नट विद्या से प्रभािवत करो राजा तुम्हें पुरस्कार दे देगा तो आज ही तुम्हारी शादी करवा दूंगा |
नगर के मध्य चौक में नट विद्या के करतब चल रहे हैं|राजा झरोखे में से देख रहा है परंतु पुरस्कार नहीं दे रहा है| 
इलायची कुमार रस्सी पर नृत्य कर रहा है थक कर चूर हो गया है लेकिन राजा पुरस्कार नही दे रहा है ।
घटना मोड़ लेती है इलायची नाचते नाचते देखता है झरोखे में एक जैन संत आहार लेने पधारे सोलह श्रंगार से सुसज्ज नारी उन्हें आहर दे रही है संत का ध्यान मात्र आहार पर है धन्य है जैन संत जिन्होंने निगाह ऊपर तक नहीं की | 
मैं इस नट कन्या के पीछे परिवार की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर शादी करने के पीछे भाग रहा हूं |
धिक्कार है मुझे विचार करते करते कर्मो की जंजीरें तोड़ दी गई और वहीं इलायची कुमार को केवल ज्ञान प्राप्त हो गया धन्य है ऐसी आत्मा को ।

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