ऋषभजी बोलावे छे Lyrics | Rishabhji Bolave Chhe Lyrics in Hindi & Gujarati

ऋषभजी बोलावे छे Lyrics | Rishabhji Bolave Chhe Lyrics in Hindi & Gujarati

ऋषभजी बोलावे छे Lyrics | Rishabhji Bolave Chhe Lyrics in Hindi & Gujarati


ऋषभजी बोलावे छे जैन भक्तिमय गीतों में अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण रचना है। यह गीत भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) के प्रति श्रद्धा, समर्पण और दिव्य अनुभूति को व्यक्त करता है। गीत में भक्त और भगवान के बीच के आत्मीय संबंध का सुंदर वर्णन मिलता है, जहाँ प्रभु स्वयं अपने भक्त को बुलाते हैं, मार्गदर्शन देते हैं और जीवन की कठिनाइयों में सहारा बनते हैं।

Rushabhji Bolave Chhe Gujarati Lyrics

ઋષભજી બોલાવે છે, એના સપના આવે છે
જે એના થઈ જાવે છે, એના એ થઈ જાવે છે
ઋષભજી બોલાવે છે…

સપનામાં એનાથી વાતો થાય;
આંખ ખૂલે ત્યાં સૌ પહેલા દેખાય,
હોઠ ને હૈયું એના ગીતો ગાય;
એના નામ-સ્મ૨ણથી સઘળું થાય,
એ આવશે… કોઈ પણ રીતે…
એની યાદમાં… રાતો વીતે…
અધ૨ાતે હરખાવે છે ને મધરાતે મલકાવે છે…
ઋષભજી બોલાવે છે…

એનો એક ભરોસો સાચો થાય;
એની પાસે હૈયુ આ ખોલાય
આમ જુઓ તો દૂ૨ ૨હે છે કયાંય;
આમ તો જાણે સાવ સમીપ કહેવાય
એ ત્યાં રહે… હું અહીં ૨હું…
તો પણ સુણે… હું જે કહું…
પછી એક ઈશારે આવે છે ને હળવેથી સમજાવે છે…
ઋષભજી બોલાવે છે…

દાદા એના આંગણ બેસાડે;
સાંજ સવારે રાત અને દાડે,
મુશ્કેલીમાં મારગ દેખાડે;
હાથ ઝાલીને મંદિર પહોંચાડે,
પગલું મૂકું… રસ્તો જડે…
રસ્તે ચડું… મંઝિલ મળે…
ગિરિરાજના દર્શન પાવે છે એ પુણ્ય ઉદય પ્રગટાવે છે…
ઋષભજી બોલાવે છે…

(रचना : प. पू. आ. उदयरत्नसूरिजी म.सा.)

Rushabhji Bolave Chhe Hindi & Gujarati Lyrics


ऋषभजी बोलावे छे, एना सपना आवे छे
जे एना थई जावे छे, एना ए थई जावे छे
ऋषभजी बोलावे छे…

सपनामां एनाथी वातो थाय;
आंख खूले त्यां सौ पहेला देखाय,
होठ ने हैयुं एना गीतो गाय;
एना नाम-स्म२णथी सघळुं थाय,
ए आवशे… कोई पण रीते…
एनी यादमां… रातो वीते…
अध२ाते हरखावे छे ने मधराते मलकावे छे…
ऋषभजी बोलावे छे…

एनो एक भरोसो साचो थाय;
एनी पासे हैयु आ खोलाय
आम जुओ तो दू२ २हे छे कयांय;
आम तो जाणे साव समीप कहेवाय
ए त्यां रहे… हुं अहीं २हुं…
तो पण सुणे… हुं जे कहुं…
पछी एक ईशारे आवे छे ने हळवेथी समजावे छे…
ऋषभजी बोलावे छे…

दादा एना आंगण बेसाडे;
सांज सवारे रात अने दाडे,
मुश्केलीमां मारग देखाडे;
हाथ झालीने मंदिर पहोंचाडे,
पगलुं मूकुं… रस्तो जडे…
रस्ते चडुं… मंझिल मळे…
गिरिराजना दर्शन पावे छे ए पुण्य उदय प्रगटावे छे…
ऋषभजी बोलावे छे…

(रचना : प. पू. आ. उदयरत्नसूरिजी म.सा.)



गीत का भावार्थ:

यह भक्ति गीत भगवान ऋषभदेव के प्रति अटूट विश्वास और प्रेम का संदेश देता है। गीत बताता है कि जो भक्त प्रभु को अपना सर्वस्व मान लेता है, प्रभु भी उसके जीवन में विशेष कृपा बरसाते हैं। उनके स्मरण मात्र से मन में शांति, विश्वास और आनंद का संचार होता है।
भक्त जब सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करता है, तब उसे जीवन के हर मोड़ पर उनका मार्गदर्शन और संरक्षण प्राप्त होता है। यही भावना इस सुंदर रचना का मुख्य संदेश है।

Rishabhji Bolave Chhe Song Details:

भजन : ऋषभजी बोलावे छे
आराध्य : भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव)
रचनाकार : प. पू. आ. उदयरत्नसूरिजी म.सा.
श्रेणी : जैन भक्ति गीत

निष्कर्ष:

"ऋषभजी बोलावे छे" केवल एक भजन नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के प्रेम, विश्वास और समर्पण की मधुर अभिव्यक्ति है। यह गीत हमें प्रभु स्मरण, श्रद्धा और आध्यात्मिक मार्ग पर दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।


जय आदिनाथ प्रभु।

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