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अजित-शान्ति स्तवन (Ajit Santi Stotra Stavan With Lyrics)

Ajit Shanti Stotra Stavan With Lyrics


अजित-शान्ति स्तवन 


अजिअं जिअ-सव्व-भयं, संतिं च पसंत-सव्व-गय-पावं।
जय-गुरु संति-गुणकरे, दो वि जिण-वरे पणिवयामि...गाहा। (1)

ववगय-मंगुल-भावे, ते हं विउल-तव-निम्मल-सहावे।
निरुवम-मह-प्पभावे, थोसामि सुदिट्ठ-सब्भावे...  गाहा। (2)

सव्व-दुक्ख-प्पसंतीणं, सव्व-पाव-प्पसंतीणं।
सया अजिअ-संतीणं, नमो अजिअ-संतीणं.... सिलोगो। (3)

अजिअ-जिण! सुह-प्पवत्तणं, तव पुरिसुत्तम! नाम-कित्तणं।
तह य धिइ-मइ-प्पवत्तणं, तव य जिणुत्तम! संति! कित्तणं.... मागहिआ (4)

मुख्य स्तवन पाठ (Gatha 5 to 15)

किरिआ-विहि-संचिअ-कम्म-किलेस-विमुक्खयरं,
अजिअं-निचिअं च गुणेहिं महामुणि-सिद्धिगयं।
अजिअस्स य संति-महा-मुणिणो वि अ संतिकरं,
स्ययं मम निव्वुइ-कारणयं च नमंसणयं.. ...  आलिंगणयं। (5)

पुरिसा! जइ दुक्ख-वारणं, जइ अ विमग्गह सुक्ख-कारणं।
अजिअं संतिं च भावओ, अभयकरे सरणं पवज्जहा.....  मागहिआ (6)

अरइ-रइ-तिमिर-विरहिअ-मुवरय-जर-मरणं,
सुर-असुर-गरुल-भुयग-वइ-पयय-पणिवइअं।
अजिअ-महमवि अ सुनय-नय-निउण-मभयकरं,
रणमुव-सरिअ भुवि-दिविज-महिअं सयय-मुवणमे....... संगययं। (7)

तं च जिणुत्तम-मुत्तम-नित्तम-सत्त-धरं,
अज्जव-मद्दव-खंति-विमुत्ति-समाहि-निहिं।
संतिकरं पणमामि दमुत्तम-तित्थयरं,
संतिणी मम-संति-समाहि-वरं-दिसउ.... सोवाणयं। (8)

सावत्थि-पुव्व-पत्थिवं च वरहत्थि-
मत्थय-पसत्थ-वित्थिन्न-संथिअं;
थिर-सरिच्छ-वच्छं मय-गल-लीलायमाण-
वर-गंध-हत्थि-पत्थाण-पत्थिअं संथवारिहं।
हत्थि-हत्थ-बाहुं धंत-कणग-रुअग-निरुवहय-पिंजरं,
पवर-लक्खणो-वचिय-सोम-चारु-रूवं;
सुइ-सुह-मणाभिराम-परम-रमणिज्ज-
वर-देव-दुंदुहि-निनाय-महुर-यर-सुह-गिरं...  वेड्ढओ। (9)

अजिअं जिआरिगणं, जिअ-सव्व-भयं भवोह-रिउं।
पणमामि अहं पयओ, पावं पसमेउ मे भयवं..... रासा-लुद्धओ (10)

कुरु-जण-वय-हत्थिणा-उर-नरीसरो पढमं,
तओ महा-चक्क-वट्टि-भोए महप्पभावो;
जो बावत्तरि-पुर-वर-सहस्स-वर-नगर-निगम-जण-वय-वई,
बत्तीसा-राय-वर-सहस्साणुयाय-मग्गो।
चउ-दस-वर-रयण-नव-महा-निहि-
चउ-सट्ठि-सहस्स-पवर-जुवईण सुंदर-वई;
चुलसी-हय-गय-रह-सय-सहस्स-सामी,
छन्नवइ-गाम-कोडि-सामी, आसी जो भारहम्मि भयवं..... वेड्ढओ। (11)

तं संतिं संति-करं, संतिण्णं सव्व-भया।
संतिं थुणामि जिणं, संतिं विहेउ मे....  रासा-नंदिअयं (12)

इक्खाग! विदेह-नरीसर! नर-वसहा! मुणि-वसहा!,
नव-सारय-ससि-सकलाणण! विगय-तमा! विहुअ-रया!.
अजिउत्तम-तेअ-गुणेहिं महामुणि! अमिअ-बला! विउल-कुला!,
पणमामि ते भव-भय-मूरण! जग-सरणा! मम सरणं. ....  चित्त-लेहा। (13)

देव-दाणविंद-चंद-सूर-वंद! हट्ठ-तुट्ठ! जिट्ठ! परम-लट्ठ-रूव!,
धंत-रुप्प-पट्ट-सेअ-सुद्ध-निद्ध-धवल-दंत-पंति!.
संति! सत्ति-कित्ति-मुत्ति-जुत्ति-गुत्ति-पवर! दित्त-तेअ-वंद-धेय!,
सव्व-लोअ-भाविअ-प्पभाव! णेअ! पइस मे समाहिं... नारायओ। (14)

विमल-ससि-कलाइरेअ-सोमं, वितिमिर-सूर-करा-इरेअ-तेअं।
तिअस-वइ-गणाइरेअ-रूवं, धरणि-धर-प्पव-राइरेअ-सारं.....  कुसुमलया (15)

अजित-शान्ति स्तवन (Gatha 16 to 25)
सत्ते अ सया अजिअं, सारीरे अ बले अजिअं।
तव-संजमे अ अजिअं, एस थुणामि जिणं अजिअं....भुअग-परिरिंगिअन् (16)

सोम-गुणेहिं पावइ न तं नव-सरय-ससी,

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तेअ-गुणेहिं पावइ न तं नव-सरय-रवी।
रूव-गुणेहिं पावइ न तं तिअस-गण-वई,
सार-गुणेहिं पावइ न तं धरणिधर-वई.....  खिज्जिअयं (17)

तित्थ-वर-पवत्तयं तम-रय-रहिअं,
धीर-जण थुअच्चिअं चुअ-कलि-कलुसं।
संति-सुह-प्पवत्तयं तिगरण-पयओ,
संतिम महा-मुणिं सरण-मुवणमे.... ललिअयं। (18)

विणओ-णय-सिर-रइ-अंजलि-रिसि-गण-संथुअं थिमिअं,
विबुहाहिव-धणवइ-नरवइ-थुअ-महि-अच्चिअं बहुसो।
अइरुग्गय-सरय-दिवायर-समहिअ-सप्पभं तवसा,
गयणंगण-वियरण-समुइअ-चारण-वंदिअं सिरसा....  किसलय-माला। (19)

असुर-गरुल-परिवंदिअं, किन्नरोरग-नमंसिअं।
देव-कोडि-सय-संथुअं, समण-संघ-परिवंदिअं...  सुमुहं। (20)

अभयं अणहं, अरयं अरुयं।
अजिअं अजिअं, पयओ पणमे....  विज्जु-विलसिअं। (21)

आगया वर-विमाण-दिव्व-कणग- रह-तुरय-पहकर-सएहिं हुलिअं।
ससंभमो-अरण-खुभिअ-लुलिअ-चल- कुंडलंगय-तिरीड-सोहंत-मउलि-माला...वेड्ढओ। (22)

जं सुर-संघा सासुर-संघा वेर-विउत्ता भत्ति-सुजुत्ता,
आयर-भूसिअ-संभम-पिंडिअ-सुट्ठु-सुविम्हिअ-सव्व-बलोघा।
उत्तम-कंचण-रयण-परूविअ-भासुर-भूसण-भासुरिअंगा,
गाय-समोणय-भत्ति-वसागय-पंजलि-पेसिअ-सीस-पणामा... रयणमाला (23)

वंदिऊण थोऊण तो जिणं, तिगुणमेव य पुणो पयाहिणं।
पणमिऊण य जिणं सुरासुरा, पमुइआ स-भवणाइं तो गया.... खित्तयम् (24)

तं महामुणि-महंपि पंजली, राग-दोस-भय-मोह-वज्जिअं।
देव-दाणव-नरिंद-वंदिअं, संति-मुत्तमं महा-तवं नमे...  खित्तयम् (25)

अजित-शान्ति स्तवन (Gatha 26 to 40 - समापन)

अंबरंतर-विआरणिआहिं, ललिअ-हंस-वहु-गामिणिआहिं।
पीण-सोणि-थण-सालिणिआहिं, सकल-कमल-दल-लोअणिआहिं.... दीवयम् (26)

पीण-निरंतर-थण-भर-विणमिय-गाय-लयाहिं,
मणि-कंचण-पसिढिल-मेहल-सोहिअ-सोणि-तडाहिं।
वर-खिंखिणि-नेउर-सतिलय-वलय-विभूसणिआहिं,
रइ-कर-चउर-मणोहर-सुंदर-दंसणिआहिं........ चित्तक्खरा। (27)

देव-सुंदरीहिं पाय-वंदिआहिं वंदिआ य जस्स ते सुविक्कमा कमा,
अप्पणो निडालएहिं मंडणोड्डण-प्पगारएहिं केहिं केहिं वि।

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अवंग-तिलय-पत्तलेह-नामएहिं चिल्लएहिं संग-यंगयाहिं,
भत्ति-सन्निविट्ठ-वंदणा-गयाहिं हुंति ते वंदिआ पुणो पुणो.... . नारायओ (28)

तमहं जिणचंदं, अजिअं जिअ-मोहं।
धुअ-सव्व-किलेसं, पयओ पणमामि......... नंदिअयं। (29)

थुअ-वंदिअस्सा रिसि-गण-देव-गणेहिं,
तो देव-वहूहिं पयओ पणमिअस्सा;
जस्स-जगुत्तम सासणअस्सा, भत्ति-वसागय-पिंडिअयाहिं।
देव-वर-च्छरसा-बहुआहिं, सुर-वर-रइ-गुण-पंडिअयाहिं..... भासुरयम् (30)

वंस-सद्द-तंति-ताल-मेलिए तिउक्ख-राभिराम-सद्द-मीसए कए अ,
सुइ-समाणणे अ सुद्ध-सज्ज-गीय-पाय-जाल-घंटिआहिं;
वलय-मेहला-कलाव-नेउ-राभिराम-सद्द-मीसए कए अ,
देव-नट्टिआहिं हाव-भाव-विब्भम-प्पगारएहिं।
नच्चिऊण अंग-हारएहिं, वंदिआ य जस्स ते सु-विक्कमा कमा;

तयं तिलोय-सव्व-सत्त-संति-कारयं,
पसंत-सव्व-पाव-दोस-मेसहं नमामि संति-मुत्तमं जिणं.....  नारायओ (31)

छत्त-चामर-पडाग-जूअ-जव-मंडिआ,
झय-वर-मगर-तुरय-सिरिवच्छ-सुलंछणा।
दीव-समुद्द-मंदर-दिसागय-सोहिआ,
त्थअ-वसह-सीह-रह-चक्कवरंकिया.......  ललिअयं (32)

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सहाव-लट्ठा सम-प्पइट्ठा, अदोस-दुट्ठा गुणेहिं जिट्ठा।
पसाय-सिट्ठा तवेण पुट्ठा, सिरीहिं इट्ठा रिसीहिं जुट्ठा.... वानवासिआ (33)

ते तवेण धूअ-सव्व-पावया, सव्व-लोअ-हिअ-मूल-पावया।
संथुआ-अजिय-संति-पायया, हुंतु मे सिव-सुहाण दायया...  अपरांतिका (34)

एवं तव-बल-विउलं, थुअं मए अजिअ-संति-जिण-जुअलं।
ववगय-कम्मरय-मलं, गइं गयं सासयं विउलं..... गाहा। (35)

तं बहु-गुणप्पसायं, मुक्ख-सुहेण परमेण अविसायं।
नासेउ मे विसायं, कुणउ अ परिसा वि अप्पसायं...... गाहा। (36)

तं मोएउ अ नंदिं, पावेउ अ नंदिसेण-मभिनंदिं।
परिसा वि अ सुह-नंदिं, मम य दिसउ संजमे नंदिं..गाहा। (37)

पक्खिअ-चाउम्मासिअ-संवच्छरिए अवस्स भणिअव्वो।
सोअव्वो सव्वेहिं, उवसग्ग-निवारणो एसो। (38)

जो पढइ जो अ निसुणइ, उभओ-कालं पि अजिअ-संति-थयं;
न हु हुंति तस्स रोगा, पुव्वुप्पन्ना वि नासंति। (39)

जइ इच्छह परम-पयं, अहवा कित्तिं सुवित्थडं भुवणे।
ता तेलुक्कु-द्धरणे, जिण-वयणे आयरं कुणह (40)

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