श्री आदिनाथ चालीसा: सम्पूर्ण पाठ, बोल और अचूक लाभ (Adinath Chalisa Lyrics)
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ भगवान) की स्तुति में रचित श्री आदिनाथ चालीसा (Shri Adinath Chalisa) अत्यंत प्रभावशाली और मंगलकारी है। भगवान आदिनाथ ने ही कर्मभूमि की शुरुआत की और युग की शुरुआत में असि, मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य और शिल्प का ज्ञान दिया। सच्चे मन से इस चालीसा का पाठ करने से भक्तों के सभी कष्ट और क्लेश दूर हो जाते हैं और जीवन में कुबेर के समान अपार धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है।
jainstutistavan.com के इस लेख में श्री आदिनाथ चालीसा के सम्पूर्ण बोल (Lyrics) और इसके पाठ से होने वाले अद्भुत लाभों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
श्री आदिनाथ चालीसा (Shri Adinath Chalisa Lyrics in Hindi)
शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन को, करुं प्रणाम |
उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम ||
सर्व साधु और सरस्वती जिन मन्दिर सुखकार |
आदिनाथ भगवान को मन मन्दिर में धार ||
-: चौपाई :-
जै जै आदिनाथ जिन स्वामी, तीनकाल तिहूं जग में नामी |
वेष दिगम्बर धार रहे हो, कर्मों को तुम मार रहे हो ||
हो सर्वज्ञ बात सब जानो सारी दुनियां को पहचानो |
नगर अयोध्या जो कहलाये, राजा नाभिराज बतलाये ||
मरुदेवी माता के उदर से, चैत वदी नवमी को जन्मे |
तुमने जग को ज्ञान सिखाया, कर्मभूमी का बीज उपाया ||
कल्पवृक्ष जब लगे बिछरने, जनता आई दुखड़ा कहने |
सब का संशय तभी भगाया, सूर्य चन्द्र का ज्ञान कराया ||
खेती करना भी सिखलाया, न्याय दण्ड आदिक समझाया |
तुमने राज किया नीति का, सबक आपसे जग ने सीखा ||
पुत्र आपका भरत बताया, चक्रवर्ती जग में कहलाया |
बाहुबली जो पुत्र तुम्हारे, भरत से पहले मोक्ष सिधारे ||
सुता आपकी दो बतलाई, ब्राह्मी और सुन्दरी कहलाई |
उनको भी विद्या सिखलाई, अक्षर और गिनती बतलाई ||
एक दिन राजसभा के अन्दर, एक अप्सरा नाच रही थी |
आयु उसकी बहुत अल्प थी, इसीलिए आगे नहीं नाच रही थी ||
विलय हो गया उसका सत्वर, झट आया वैराग्य उमड़कर |
बेटों को झट पास बुलाया, राज पाट सब में बंटवाया ||
छोड़ सभी झंझट संसारी, वन जाने की करी तैयारी |
राव (राजा) हजारों साथ सिधाए, राजपाट तज वन को धाये ||
लेकिन जब तुमने तप किना, सबने अपना रस्ता लीना |
वेष दिगम्बर तजकर सबने, छाल आदि के कपड़े पहने ||
भूख प्यास से जब घबराये, फल आदिक खा भूख मिटाये |
तीन सौ त्रेसठ धर्म फैलाये, जो अब दुनियां में दिखलाये ||
छैः महीने तक ध्यान लगाये, फिर भोजन करने को धाये |
भोजन विधि जाने नहिं कोय, कैसे प्रभु का भोजन होय ||
इसी तरह बस चलते चलते, छः महीने भोजन बिन बीते |
नगर हस्तिनापुर में आये, राजा सोम श्रेयांस बताए ||
याद तभी पिछला भव आया, तुमको फौरन ही पड़धाया |
रस गन्ने का तुमने पाया, दुनिया को उपदेश सुनाया ||
तप कर केवल ज्ञान पाया, मोक्ष गए सब जग हर्षाया |
अतिशय युक्त तुम्हारा मन्दिर, चांदखेड़ी भंवरे के अन्दर ||
उसका यह अतिशय बतलाया, कष्ट क्लेश का होय सफाया |
मानतुंग पर दया दिखाई, जंजीरें सब काट गिराई ||
राजसभा में मान बढ़ाया, जैन धर्म जग में फैलाया |
मुझ पर भी महिमा दिखलाओ, कष्ट भक्त का दूर भगाओ ||
सोरठाः-
पाठ करे चालीस दिन, नित चालीस ही बार |
चांदखेड़ी में आय के, खेवे धूप अपार ||
जन्म दरिद्री होय जो, होय कुबेर समान |
नाम वंश जग में चले, जिनके नहीं सन्तान ||
आदिनाथ चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ (Benefits of Shri Adinath Chalisa)
- चालीसा के सोरठा में इसके अनंत लाभों का स्पष्ट वर्णन किया गया है। नियमित रूप से इसका पठन करने से भक्तों को निम्नलिखित फल प्राप्त होते हैं:
- दरिद्रता का नाश और धन प्राप्ति: "जन्म दरिद्री होय जो, होय कुबेर समान" - जो व्यक्ति जन्म से दरिद्र है, वह भी इस चालीसा के प्रभाव से कुबेर के समान धनवान बन जाता है।
- संतान सुख की प्राप्ति: "नाम वंश जग में चले, जिनके नहीं सन्तान" - जिन दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुई है, भगवान आदिनाथ की कृपा से उन्हें योग्य संतान की प्राप्ति होती है और उनका वंश आगे बढ़ता है।
- कष्टों और संकटों से रक्षा: जिस प्रकार भगवान ने आचार्य मानतुंग पर दया कर उनकी जंजीरें काट दी थीं, उसी प्रकार वे अपने भक्तों के हर प्रकार के कष्ट और क्लेश का सफाया करते हैं।
पाठ करने का विशेष नियम और विधि
सुख-समृद्धि की विशेष कामना के लिए इस चालीसा का ४० (40) दिनों तक प्रतिदिन ४० बार पाठ करना चाहिए। प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, भगवान आदिनाथ जी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष धूप-दीप प्रज्वलित करें, और पूर्ण एकाग्रता व श्रद्धा के साथ Adinath Chalisa का पाठ करें। संभव हो तो चांदखेड़ी अतिशय क्षेत्र जाकर दर्शन और धूप खेने से विशेष फल मिलता है।
Tags:
Jain Chalisa
.jpg)