श्री सुमतिनाथ चालीसा: सम्पूर्ण पाठ, बोल और सद्बुद्धि के अचूक लाभ (Sumatinath Chalisa Lyrics)
जैन धर्म के ५वें (5th) तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ जी की स्तुति में रचित श्री सुमतिनाथ चालीसा (Shri Sumatinath Chalisa) अत्यंत कल्याणकारी है। अयोध्या नगरी में राजा मेघरथ और माता मंगला रानी के घर जन्मे भगवान सुमतिनाथ का पावन चिन्ह 'चकवा' (Chakwa) है। इस चालीसा में जीवन रुपी नौका को भवसागर से पार लगाने का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। मान्यता है कि जो भी भव्य जीव नित्य इस चालीसा का पाठ करता है, उसे भगवान सुमतिनाथ सद्बुद्धि का दान देते हैं और जीवन के सभी विषाद मिट जाते हैं।
नीचे jainstutistavan.com पर श्री सुमतिनाथ चालीसा के सम्पूर्ण बोल (Lyrics) और इसके पाठ के अचूक लाभ दिए गए हैं।
श्री सुमतिनाथ चालीसा (Shri Sumatinath Chalisa Lyrics in Hindi)
श्री सुमतिनाथ का करूणा निर्झर, भव्य जनो तक पहूँचे झर – झर ।।
नयनो में प्रभु की छवी भऱ कर, नित चालीसा पढे सब घर – घर ।।
जय श्री सुमतिनाथ भगवान, सब को दो सदबुद्धि – दान ।।
अयोध्या नगरी कल्याणी, मेघरथ राजा मंगला रानी ।।
दोनो के अति पुण्य पर्रजारे, जो तीर्थंकर सुत अवतारे ।।
शुक्ला चैत्र एकादशी आई, प्रभु जन्म की बेला आई ।।
तीन लोक में आनंद छाया, नरकियों ने दुःख भुलाया ।।
मेरू पर प्रभु को ले जा कर, देव न्हवन करते हर्षाकार ।।
तप्त स्वर्ण सम सोहे प्रभु तन, प्रगटा अंग – प्रतयंग में योवन ।।
ब्याही सुन्दर वधुएँ योग, नाना सुखों का करते भोग ।।
राज्य किया प्रभु ने सुव्यवस्थित, नही रहा कोई शत्रु उपस्थित ।।
हुआ एक दिन वैराग्य जब, नीरस लगने लगे भोग सब ।।
जिनवर करते आत्म चिन्तन, लौकान्तिक करते अनुमोदन ।।
गए सहेतुक नावक वन में, दीक्षा ली मध्याह्म समय में ।।
बैसाख शुक्ला नवमी का शुभ दिन, प्रभु ने किया उपवास तीन दिन ।।
हुआ सौमनस नगर विहार, धुम्नधुति ने दिया आहार ।।
बीस वर्ष तक किया तप घोर, आलोकित हुए लोका लोक ।।
एकादशी चैत्र की शुक्ला, धन्य हुई केवल – रवि निकाला ।।
समोशरण में प्रभु विराजे, दृवादश कोठे सुन्दर साजें ।।
दिव्यध्वनि जब खिरी धरा पर, अनहद नाद हुआ नभ उपर ।।
किया व्याख्यान सप्त तत्वो का, दिया द्रष्टान्त देह – नौका का ।।
जीव – अजिव – आश्रव बन्ध, संवर से निर्जरा निर्बन्ध ।।
बन्ध रहित होते है सिद्ध, है यह बात जगत प्रसिद्ध ।।
नौका सम जानो निज देह, नाविक जिसमें आत्म विदह ।।
नौका तिरती ज्यो उदधि में, चेतन फिरता भवोदधि में ।।
हो जाता यदि छिद्र नाव में, पानी आ जाता प्रवाह में ।।
ऐसे ही आश्रव पुद्गल में, तीन योग से हो प्रतीपल में ।।
भरती है नौका ज्यो जल से, बँधती आत्मा पुण्य पाप से ।।
छिद्र बन्द करना है संवर, छोड़ शुभाशुभ – शुद्धभाव धर ।।
जैसे जल को बाहर निकाले, संयम से निर्जरा को पाले ।।
नौका सुखे ज्यों गर्मी से, जीव मुक्त हो ध्यानाग्नि से ।।
ऐसा जान कर करो प्रयास, शाश्वत सुख पाओ सायास ।।
जहाँ जीवों का पुन्य प्रबल था, होता वही विहार स्वयं था ।।
उम्र रही जब एक ही मास, गिरि सम्मेद पे किया निवास ।।
शुक्ल ध्यान से किया कर्मक्षय, सन्धया समय पाया पद अक्षय ।।
चैत्र सुदी एकादशी सुन्दर, पहुँच गए प्रभु मुक्ति मन्दिर ।।
चिन्ह प्रभु का चकवा जान, अविचल कूट पूजे शुभथान ।।
इस असार संसार में , सार नही है शेष ।।
हम सब चालीसा पढे, रहे विषाद न लेश ।।
सुमतिनाथ चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ (Benefits of Sumatinath Chalisa)
- चालीसा की पवित्र पंक्तियों में इसके अनगिनत लाभ छुपे हैं। नियमित रूप से इसका पठन करने से भक्तों को निम्नलिखित फल प्राप्त होते हैं:
- सद्बुद्धि और विवेक की प्राप्ति: "सब को दो सदबुद्धि – दान" - इस पाठ के प्रभाव से अज्ञानता दूर होती है और व्यक्ति को सत्य-असत्य को पहचानने की उत्तम बुद्धि प्राप्त होती है।
- दुःखों और विषाद का नाश: "रहे विषाद न लेश" - सुमतिनाथ भगवान की करुणा से जीवन के सभी दुःख, मानसिक तनाव और कष्ट मिट जाते हैं।
- सप्त तत्वों का ज्ञान: इस चालीसा में देह को नौका और आत्मा को नाविक मानकर 'आस्रव' और 'संवर' का जो मर्म समझाया गया है, वह व्यक्ति को संसार के मोह-माया से बचाता है।
- शाश्वत सुख और मोक्ष: नियमित स्मरण से आत्मा पाप कर्मों से मुक्त होती है और अंततः शाश्वत सुख (मोक्ष) की प्राप्ति होती है।
पाठ करने का सही नियम
प्रातः काल स्नानादि से निवृत्त होकर, साफ वस्त्र धारण करें। एकांत स्थान पर भगवान सुमतिनाथ जी (जिनका पावन चिन्ह चकवा है) की प्रतिमा या चित्र के समक्ष बैठें। धूप-दीप जलाकर पूर्ण एकाग्रता और निर्मल भाव से Shri Sumatinath Chalisa का पाठ करें।
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