एक वार नेम मारी सामु जुओने (Hindi Lyrics) | Jain Stavan Lyrics | Jain Stuti Stavan

एक वार नेम मारी सामु जुओने (Hindi Lyrics) | Jain Stavan Lyrics | Jain Stuti Stavan

एक वार नेम मारी सामु जुओने (Hindi Lyrics)  Jain Stavan Lyrics  Jain Stuti Stavan


"एक वार नेम मारी सामु जुओने" (Ek Vaar Nem Maari Samu Juone) एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी जैन स्तवन है। यह गीत २२वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ (Shri Neminath Bhagwan) को समर्पित है। इस स्तवन में एक भक्त की प्रभु के प्रति असीम तड़प, करुणा की पुकार और जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष (समाधि मरण) पाने की गहरी भावना व्यक्त की गई है। भक्त संसार की असारता को समझते हुए अपने कर्मों का पश्चाताप करता है और प्रभु की शरण में पूर्ण शांति खोजता है।

यहाँ इस भक्तिमय स्तवन के बोल और इसके गहरे अर्थ को समझाया गया है।

एक वार नेम मारी सामु जुओने (Lyrics)

सामु जुओ ने मारे सामु जुओने, एक वार नेम मारी सामु जुओने
करुणा दृष्टि थी मारे सामु जुओने, अमिदृष्टि थी मारी सामु जुओने
सामु जुओ ने मारे सामु जुओ ने, एक वार नेम मारी सामु जुओने ||1||

निगोद ना दिवसों मने यादज आवता, हु अने तू रह्या एकज धाम मा
अनादि काळ थी दुःखो ने खमता, आ चौरासी लाख योनि मा भमता
भवो भव सुधी साथे रह्या, आजे मने केम छोड़ी गया
तारा विना दादा मने कौन पूछे ना, मारी आँखियो ना आंसू कौन लुछे ना
सामु जुओ ने मारे सामु जुओ ने, एक वार नेम मारी सामु जुओने ||2||

संसार असार छे मोक्षज सार छे, तारी वातो मैं तो सुनी नलवार छे,
मोह माया ना झूले हु झुलियो, राची माची ने कर्मो मैं बांध्या,
हस्ता हस्ता कर्मो मैं बांध्या, आत्मा मा कर्मो ना ढगला भर्या
रोता रोता आज मारा कर्मो छुटे ना, दुःखो ना डूंगर मारा आज टूटे ना
सामु जुओ ने मारे सामु जुओ ने, एक वार नेम मारी सामु जुओने ||3||

छेल्ली विनंती मारी दादा तू सुणजे, अंत समये मुज़ने तू मलजे ,
पीड़ा ज्यारे रग रग माथी व्यापे, तारा दर्शन नी ठंडक तू आपजे,
झंजाल जगनी छोड़ी गई, मने तारा ध्यान मा स्थिर करी,
समाधि मरण मले एवुं हु मांगु, भव भवना फेरा टले एवुं हु मांगु

स्तवन का भावार्थ (Meaning of the Stavan)

इस स्तवन की हर पंक्ति में वैराग्य और समर्पण का अनूठा संगम है। इसका मुख्य सारांश इस प्रकार है:

  • प्रभु की करुणा दृष्टि की पुकार: भक्त भगवान नेमिनाथ से प्रार्थना करता है कि वे एक बार उसकी ओर करुणा और वात्सल्य (अमिदृष्टि) से देखें। संसार के इस सफर में प्रभु के बिना भक्त का दुःख हरने और आंसू पोंछने वाला कोई दूसरा नहीं है।

  • संसार की असारता और कर्मों का बोझ: भक्त अपनी भूल स्वीकार करता है कि वह मोह-माया के झूले में फँसकर हँसते-हँसते भारी कर्म बांधता रहा। अब वे ही कर्म उसे रुला रहे हैं और दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उसे यह परम सत्य समझ आ गया है कि यह संसार असार है और केवल मोक्ष ही शाश्वत सार है।

  • समाधि मरण की अंतिम विनती: गीत के अंत में भक्त भगवान से अपनी अंतिम प्रार्थना करता है कि जीवन के अंतिम समय में प्रभु उसे दर्शन दें। वह चाहता है कि दुनिया की सारी झंझटें छूट जाएं और वह प्रभु के ध्यान में स्थिर होकर 'समाधि मरण' प्राप्त करे, जिससे जन्म-मरण के ये 84 लाख योनियों के फेरे हमेशा के लिए मिट जाएं।

भगवान नेमिनाथ की भक्ति का फल 

जो भी भव्य जीव सच्चे मन और वैराग्य भाव से इस स्तवन का गान करता है, उसके मन से मोह-माया का प्रभाव कम होता है। आत्मा निर्मल होती है और व्यक्ति सच्चे आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होता है।





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