जय जय गरवो गिरनार: Jai Jai Garvo Girnar Lyrics in Hindi | Jain Stavan - Jain Stuti Stavan

जय जय गरवो गिरनार: भावार्थ और महिमा (Jai Jai Garvo Girnar Lyrics)

जय जय गरवो गिरनार भावार्थ और महिमा (Jai Jai Garvo Girnar Lyrics)


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"जय जय गरवो गिरनार" एक अत्यंत भावपूर्ण और ऐतिहासिक जैन स्तवन है जो २२वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ (Shri Neminath Bhagwan) और जैन धर्म के शाश्वत तीर्थ, माउंट गिरनार को समर्पित है। यह गीत इस पावन पर्वत की महिमा का गुणगान करता है, जिसे अनंत आत्माओं की दीक्षा और मोक्ष भूमि (निर्वाण भूमि) माना जाता है। गीत में गजपद कुंड, सहसावन, माता अंबिका और उन महान मुनियों व श्रावकों (जैसे पेथड शाह, सज्जन शाह) के बलिदानों को भी याद किया गया है, जिन्होंने इस तीर्थ की रक्षा की।

नीचे jainstutistavan.com पर इस भक्तिमय स्तवन की पंक्तियाँ और इसका महत्व दिया गया है।

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जय जय गरवो गिरनार (Jai Jai Garvo Girnar Lyrics)

नेम प्रभु ना पावन पगले थयो धन्य पेलो गीरनार
जय गीरनार, जय गीरनार, जय जय गरवो गीरनार

जय जय गरवो गीरनार, जय जय गरवो गीरनार
नेमनाथ गीरी शणगार, जय जय गरवो गीरनार

पंचम शिखर शत्रुंजय तणुं, ए सिद्धगीरी छे धाम,
कैलास, उज्ज्यंत, रैवत, नंदभद्र, स्वर्णगीरी गीरनार,
नामो कर्ण विहर प्रासाद , जय जय गरवो गीरनार (२)

ज्यां शोभे अंबिका मां, शासन ने सदा सुखकार,
भावे प्रणमुं श्री नेमी जिनेश्वर, गीरी भूषण शणगार,
पृथ्वी ना तिलक समान, जय जय गरवो गीरनार (२)

छे अनंत आत्माओ तणी, दीक्षा भूमि गीरनार,
छे अनंत तीर्थंकर तणी, कैवल्य भूमि गीरनार,
ने आवती चोवीसी तणी, निर्वाण भूमि गीरनार,
अध्यात्म नगरी गीरनार, जय जय गरवो गीरनार (२)

चौद हाजर नदी ना ज्यां जळ समा,आ शीतळ गजपद कुंड,
ज्यां द्रष्टि अनुभवे धन्यता जोई राजुल रहनेमी टूंक,
दीक्षा केवळ सहसावने, नामो समवसरण जीन बिंब,
दीपे शिखरो नी माळ, वंदन वंदन वंदन

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ज्यां ना कणे कण मां वसे, महापुरुषो ना बलिदान,
धार पेथड सज्जन झांझडशा, नामे वही आ रक्तधार,
वंदु हिमांशुसूरी, धर्म रक्षित, हेम वल्लभ मुनी राज,
सौ चालो जईए गीरनार, जय जय गरवो गीरनार

स्तवन का भावार्थ और गिरनार तीर्थ का महत्व (Significance of the Stavan)

इस स्तवन में गिरनार महातीर्थ के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को बहुत ही सुंदर ढंग से पिरोया गया है:

  • पावन भूमि: भगवान नेमिनाथ के पावन चरणों से गिरनार पर्वत धन्य हो गया है। यह पर्वत अध्यात्म की नगरी है जहाँ से अनंत आत्माओं ने मोक्ष प्राप्त किया है।

  • तीर्थ दर्शन: गीत में गिरनार के प्रमुख स्थलों जैसे राजुल-रहनेमी टोंक, चौदह हजार नदियों के जल के समान शीतल गजपद कुंड और सहसावन (जहाँ प्रभु ने दीक्षा और केवल ज्ञान प्राप्त किया) का उल्लेख है।

  • शासन रक्षक: शासन की अधिष्ठायिका देवी अंबिका माँ की उपस्थिति और तीर्थ की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले महापुरुषों को इस गीत के माध्यम से वंदन किया गया है।

गिरनार तीर्थ वंदना के लाभ 

जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से इस स्तवन का गान करते हैं और गिरनार महातीर्थ की वंदना करते हैं, उनके जीवन में असीम शांति आती है और आत्मा मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होती है।



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