जय जय गरवो गिरनार: भावार्थ और महिमा (Jai Jai Garvo Girnar Lyrics)
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"जय जय गरवो गिरनार" एक अत्यंत भावपूर्ण और ऐतिहासिक जैन स्तवन है जो २२वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ (Shri Neminath Bhagwan) और जैन धर्म के शाश्वत तीर्थ, माउंट गिरनार को समर्पित है। यह गीत इस पावन पर्वत की महिमा का गुणगान करता है, जिसे अनंत आत्माओं की दीक्षा और मोक्ष भूमि (निर्वाण भूमि) माना जाता है। गीत में गजपद कुंड, सहसावन, माता अंबिका और उन महान मुनियों व श्रावकों (जैसे पेथड शाह, सज्जन शाह) के बलिदानों को भी याद किया गया है, जिन्होंने इस तीर्थ की रक्षा की।
नीचे jainstutistavan.com पर इस भक्तिमय स्तवन की पंक्तियाँ और इसका महत्व दिया गया है।
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जय जय गरवो गिरनार (Jai Jai Garvo Girnar Lyrics)
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स्तवन का भावार्थ और गिरनार तीर्थ का महत्व (Significance of the Stavan)
इस स्तवन में गिरनार महातीर्थ के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को बहुत ही सुंदर ढंग से पिरोया गया है:
पावन भूमि: भगवान नेमिनाथ के पावन चरणों से गिरनार पर्वत धन्य हो गया है। यह पर्वत अध्यात्म की नगरी है जहाँ से अनंत आत्माओं ने मोक्ष प्राप्त किया है।
तीर्थ दर्शन: गीत में गिरनार के प्रमुख स्थलों जैसे राजुल-रहनेमी टोंक, चौदह हजार नदियों के जल के समान शीतल गजपद कुंड और सहसावन (जहाँ प्रभु ने दीक्षा और केवल ज्ञान प्राप्त किया) का उल्लेख है।
शासन रक्षक: शासन की अधिष्ठायिका देवी अंबिका माँ की उपस्थिति और तीर्थ की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले महापुरुषों को इस गीत के माध्यम से वंदन किया गया है।
गिरनार तीर्थ वंदना के लाभ
जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से इस स्तवन का गान करते हैं और गिरनार महातीर्थ की वंदना करते हैं, उनके जीवन में असीम शांति आती है और आत्मा मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होती है।
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