श्री सुपार्श्वनाथ चालीसा: सम्पूर्ण पाठ, बोल और संकट मोचन लाभ (Suparshvanath Chalisa Lyrics)
जैन धर्म के ७वें (7th) तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ जी की स्तुति में रचित श्री सुपार्श्वनाथ चालीसा (Shri Suparshvanath Chalisa) अत्यंत मंगलकारी और शांति प्रदायक है। वाराणसी नगरी में राजा सुप्रतिष्ठित और रानी पृथ्वीसेना के यहाँ जन्मे भगवान सुपार्श्वनाथ का पावन चिन्ह 'स्वास्तिक' (Swastika) है। मान्यता है कि सच्चे मन से इस चालीसा का पाठ करने से भक्तों के सभी संकट कट जाते हैं और क्रोध व काम जैसे विकारों का नाश हो जाता है।
नीचे jainstutistavan.com पर श्री सुपार्श्वनाथ चालीसा के सम्पूर्ण बोल (Lyrics) और इसके नित्य पाठ से होने वाले अद्भुत लाभों का वर्णन किया गया है।
श्री सुपार्श्वनाथ चालीसा (Shri Suparshvanath Chalisa Lyrics in Hindi)
सुपार्श्वनाथ चालीसा पाठ के अचूक लाभ (Benefits of Suparshvanath Chalisa)
इस चालीसा के अंतिम छंदों में इसके अनगिनत लाभ स्पष्ट रूप से वर्णित हैं। जो भी भव्य जीव नित्य इसका पाठ करता है, उसे निम्नलिखित फल प्राप्त होते हैं:
संकटों से मुक्ति: "जो भी प्रभु का ध्यान लगाते, उनके सब संकट कट जाते" - भगवान सुपार्श्वनाथ की भक्ति से जीवन के सभी शारीरिक, मानसिक और सांसारिक संकट दूर हो जाते हैं।
भव-सिंधु से पार: स्वास्तिक चिन्ह वाले जिनराज जीवन रूपी नौका को संसार के भव-सिंधु से पार लगाते हैं।
क्रोध और काम का नाश: "मान हरे क्रोधी कामी का" - इस पाठ के प्रभाव से मनुष्य के भीतर छुपे हुए क्रोध, काम-वासना और अहंकार का नाश होता है तथा मन में वैराग्य व समता का भाव जागृत होता है।
मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से भगवान का नाम सुमिरन करने से हर मनोकामना (आस) पूर्ण होती है।
चालीसा का पाठ कैसे करें?
चालीसा में ही निर्देशित है कि "जिन मंदिर में जा कर पढ़ना।" सर्वोत्तम फल की प्राप्ति के लिए प्रातः काल स्नानादि कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और निकटतम जैन मंदिर में जाकर भगवान सुपार्श्वनाथ जी की प्रतिमा के समक्ष यह पाठ करें। यदि मंदिर जाना संभव न हो, तो घर के एकांत और पवित्र स्थान पर प्रभु के चित्र या 'स्वास्तिक' चिन्ह के समक्ष दीपक प्रज्वलित कर पूर्ण श्रद्धा से Shri Suparshvanath Chalisa का पाठ करें।
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